अध्याय 1 - श्लोक 39

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् ।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्धिर्जनार्दन ॥ ३९ ॥

kathaṃ na jñeyamasmābhiḥ pāpādasmānnivartitum .
kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ prapaśyaddhirjanārdana .. 39 ..


तो भी हे जनार्दन! कुलनाशजन्य दोष को भली प्रकार जानने वाले हम लोगों को इस पाप से बचने का उपाय क्यों नहीं खोजना चाहिये?॥ ३९॥