पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्चिनौ बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्य
मरुतस्तथा ।
भारत ॥ ६ ॥
मरुतस्तथा ।
भारत ॥ ६ ॥
paśyādityānvasūnrudrānaścinau bahūnyadṛṣṭapūrvāṇi paśya
marutastathā .
bhārata .. 6 ..
हे भारत! तू द्वादश आदित्यों को, आठ वसुओं को, एकादश रुद्रों को, दोनों अश्विनीकुमारों को और उनचास मरुद्गणों को देख। तथा और भी जिन्हें मनुष्यलोक में तू ने अथवा और किसी ने भी कभी नहीं देखा, ऐसे बहुत-से आश्चर्यमय—अद्भुत दृश्य देख ॥ ६ ॥
केवल इतना ही नहीं—
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पश्य आदित्यान् द्वादश, वसून् अष्टौ, रुद्रान् एकादश, अश्विनौ द्वौ, मरुतः सप्तसप्तगणा ये तान्, तथा बहूनि अन्यानि अपि अदृष्टपूर्वाणि मनुष्यलोके त्वया अन्येन वा केनचित् पश्य आश्चर्याणि अद्भुतानि भारत ॥ ६ ॥
न केवलम् एतावद् एव—