जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ ९ ॥
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ ९ ॥
janma karma ca me divyamevaṃ yo vetti tattvataḥ.
tyaktvā dehaṃ punarjanma naiti māmeti so’rjuna .. 9 ..
मेरा मायामय जन्म और साधुरक्षण आदि कर्म दिव्य हैं, अर्थात् अलौकिक हैं—यानी केवल ईश्वरशक्ति से ही होनेवाले हैं। इस प्रकार जो तत्त्व से यथार्थ जानता है।
यह मोक्ष-मार्ग अभी आरम्भ हुआ है, ऐसी बात नहीं, किंतु पहले भी—
तात्पर्य पढ़ें
न एष मोक्षमार्ग इदानीं प्रवृत्तः किं तर्हि पूर्वम् अपि—