न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः ।
माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः ॥ १५ ॥
माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः ॥ १५ ॥
na māṃ duṣkṛtino mūḍhāḥ prapadyante narādhamāḥ .
māyayāpahṛtajñānā āsuraṃ bhāvamāśritāḥ .. 15 ..
जो कोई पापकर्म करनेवाले मूढ़ और नराधम हैं अर्थात् मनुष्यों में अधम—नीच हैं एवं माया द्वारा जिनका ज्ञान छीन लिया गया है वे हिंसा, मिथ्याभाषण आदि आसुरी भावों के आश्रित हुए मनुष्य मुझ परमेश्वर की शरण में नहीं आते ॥ १५ ॥
परंतु जो पुण्यकर्म करनेवाले नरश्रेष्ठ हैं (वे क्या करते हैं सो बतलाते हैं—)
तात्पर्य पढ़ें
न मां परमेश्वरं दुष्कृतिनः पापकारिणो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमा नराणां मध्ये अधमा निकृष्टाः ते च मायया अपहृतज्ञानाः सम्मुषितज्ञाना आसुरं भावं हिंसानृतादिलक्षणम् आश्रिताः ॥ १५ ॥
ये पुनः नरोत्तमाः पुण्यकर्माणः—