मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥ १६ ॥
ābrahmabhuvanāllokāḥ punarāvartino’rjuna .
māmupetya tu kaunteya punarjanma na vidyate .. 16 ..
जिसमें प्राणी उत्पन्न होते और निवास करते हैं उसका नाम भुवन है, ब्रह्मलोक ब्रह्मभुवन कहलाता है।
हे अर्जुन! ब्रह्मलोकपर्यन्त अर्थात् ब्रह्मलोकसहित समस्त लोक पुनरावर्ती हैं अर्थात् जिनमें जाकर फिर संसार में जन्म लेना पड़े, ऐसे हैं। परंतु हे कुन्तीपुत्र! केवल एक मुझे प्राप्त होनेपर फिर पुनर्जन्म—पुनरुत्पत्ति नहीं होती॥ १६॥
ब्रह्मलोकसहित समस्त लोक पुनरावर्ती किस कारण से हैं? कालसे परिच्छिन्न हैं इसलिये; कालसे परिच्छिन्न कैसे हैं?—
तात्पर्य पढ़ें
आब्रह्मभुवनाद् भवन्ति यस्मिन् भूतानि इति भुवनं ब्रह्मभुवनं ब्रह्मलोक इत्यर्थः।
आब्रह्मभुवनात् सह ब्रह्मभुवनेन लोकाः सर्वे पुनरावर्तिनः पुनरावर्तनस्वभावा हे अर्जुन। माम् एकम् उपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म पुनरुत्पत्तिः न विद्यते ॥ १६ ॥
ब्रह्मलोकसहिता लोकाः कस्मात् पुनरावर्तिनः, कालपरिच्छिन्नत्वात्, कथम्—