पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् ।
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥ २४ ॥
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥ २४ ॥
purodhasāṁ ca mukhyaṁ māṁ
viddhi pārtha bṛhaspatim
senānīnām ahaṁ skandaḥ
sarasām asmi sāgaraḥ
हे अर्जुन! मुझे समस्त पुरोहितों में मुख्य पुरोहित बृहस्पति जानो । मैं ही समस्त सेनानायकों में कार्तिकेय हूँ और समस्त जलाशयों में समुद्र हूँ ।
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तात्पर्य पढ़ें
इन्द्र स्वर्ग का प्रमुख देवता है और स्वर्ग का राजा कहलाता है । जिस लोक में उसका शासन है वह इन्द्रलोक कहलाता है । बृहस्पति राजा इन्द्र के पुरोहित हैं और चूँकि इन्द्र समस्त राजाओं का प्रधान है, इसीलिए बृहस्पति समस्त पुरोहितों में मुख्य हैं । जैसे इन्द्र सभी राजाओं के प्रमुख हैं, इसी प्रकार पार्वती तथा शिव के पुत्र स्कन्द या कार्तिकेय समस्त सेनापतियों के प्रधान हैं । समस्त जलाशयों में समुद्र सबसे बड़ा है । कृष्ण के ये स्वरूप उनकी महानता के ही सूचक हैं ।