आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः ।
रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः ॥ ८ ॥

शब्दार्थ

आयुः - जीवन काल; सत्त्व - अस्तित्व; बल - बल; आरोग्य - स्वास्थ्य; सुख - सुख; प्रीति - तथा संतोष; विवर्धनाः - बढ़ाते हुए; रस्याः - रस से युक्त; स्निग्धाः - चिकना; स्थिराः - सहिष्णु; हृद्याः - हृदय को भाने वाले; आहाराः - भोजन; सात्त्विक - सतोगुणी; प्रियाः - अच्छे लगने वाले ।

भावार्थ

जो भोजन सात्त्विक व्यक्तियों को प्रिय होता है, वह आयु बढ़ाने वाला, जीवन को शुद्ध करने वाला तथा बल, स्वास्थ्य, सुख तथा तृप्ति प्रदान करने वाला होता है । ऐसा भोजन रसमय, स्निग्ध, स्वास्थ्यप्रद तथा हृदय को भाने वाला होता है ।