कट्‌वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः ।
आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः ॥ ९ ॥

शब्दार्थ

कटु - कडुवे, तीते; अम्ल - खट्टे; लवण - नमकीन; अति-उष्ण - अत्यन्त गरम; तीक्ष्ण - चटपटे; रुक्ष - शुष्क; विदाहिनः - जलाने वाले; आहाराः - भोजन; राजसस्य - रजो गुणी के; इष्टाः - रुचिकर; दुःख - दुख; शोक - शोक; आमय - रोग; प्रदाः - उत्पन्न करने वाले ।

भावार्थ

अत्यधिक तिक्त, खट्टे, नमकीन, गरम, चटपटे, शुष्क तथा जलन उत्पन्न करने वाले भोजन रजोगुणी व्यक्तियों को प्रिय होते हैं । ऐसे भोजन दुख, शोक तथा रोग उत्पन्न करने वाले हैं ।