वेदांग

छह अंग: शिक्षा (उच्चारणशास्त्र), व्याकरण, छन्द, निरुक्त (व्युत्पत्तिशास्त्र), ज्योतिष (खगोलशास्त्र एवं फलित ज्योतिष), कल्प (कर्मकांड-विधि)।

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