श्रुति
श्रुति — अपौरुषेय, नित्य, श्रवण-परंपरा से प्राप्त वह ज्ञान जिसका कोई मानव रचयिता नहीं। यहाँ वर्गीकरण वेद के अनुसार नहीं, अपितु ग्रंथ-स्तर के अनुसार किया गया है, क्योंकि पाठक ईश उपनिषद् को खोजता है, न कि 'शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद्-स्तर' को। प्रत्येक ग्रंथ का मूल वेद एक विशेषता के रूप में अंकित है, जिससे परंपरा सुरक्षित रहती है परन्तु दिशा-निर्देशन का आधार नहीं बनती।
संहिता
अभी संग्रहित नहींयज्ञ में प्रयुक्त छांदस स्तोत्रों, मंत्रों और आशीर्वचनों के मूल संग्रह।
ब्राह्मण
अभी संग्रहित नहींगद्यात्मक व्याख्या — कर्मकांड का निर्देशन और उसे व्यक्त करने वाली कथाएँ।
आरण्यक
अभी संग्रहित नहींवन-ग्रंथ — अनुष्ठान से उसके अंतर्निहित अर्थ की ओर मुड़ता चिंतन।
उपनिषद्
अभी संग्रहित नहींवेदांत — वेद का अंतिम भाग। तेरह प्रमुख उपनिषद् और सौ से अधिक लघु उपनिषद्।