श्रुति
श्रुति — अपौरुषेय, नित्य, श्रवण-परंपरा से प्राप्त वह ज्ञान जिसका कोई मानव रचयिता नहीं। यहाँ वर्गीकरण वेद के अनुसार नहीं, अपितु ग्रंथ-स्तर के अनुसार किया गया है, क्योंकि पाठक ईश उपनिषद् को खोजता है, न कि 'शुक्ल यजुर्वेद के उपनिषद्-स्तर' को। प्रत्येक ग्रंथ का मूल वेद एक विशेषता के रूप में अंकित है, जिससे परंपरा सुरक्षित रहती है परन्तु दिशा-निर्देशन का आधार नहीं बनती।
इस विभाग के ग्रंथों को शीर्षक, लेखक और विवरण द्वारा खोजता है।
संहिता
अभी संग्रहित नहींयज्ञ में प्रयुक्त छांदस स्तोत्रों, मंत्रों और आशीर्वचनों के मूल संग्रह।
ब्राह्मण
अभी संग्रहित नहींगद्यात्मक व्याख्या — कर्मकांड का निर्देशन और उसे व्यक्त करने वाली कथाएँ।
आरण्यक
अभी संग्रहित नहींवन-ग्रंथ — अनुष्ठान से उसके अंतर्निहित अर्थ की ओर मुड़ता चिंतन।
उपनिषद्
8 ग्रंथवेदांत — वेद का अंतिम भाग। तेरह प्रमुख उपनिषद् और सौ से अधिक लघु उपनिषद्।
ईशावास्योपनिषद् (ईशोपनिषद्) — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित ईशावास्योपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।
केनोपनिषद् — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित केनोपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।
कठोपनिषद् — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित कठोपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।
प्रश्नोपनिषद् — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित प्रश्नोपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।
मुण्डकोपनिषद् — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित मुण्डकोपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।
माण्डूक्योपनिषद् — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, गौडपादीय कारिका, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित माण्डूक्योपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।
ऐतरेयोपनिषद् — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित ऐतरेयोपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।
तैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्य
मूल संस्कृत मन्त्र, आदि शङ्कराचार्यकृत भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित तैत्तिरीयोपनिषद् (गीताप्रेस, गोरखपुर)।