शान्तिपाठ

तत्सद्ब्रह्मणे नमः


ईशिता सर्वभूतानां सर्वभूतमयश्च यः ।
ईशावास्येन सम्बोध्यमीश्वरं तं नमाम्यहम् ॥

īśitā sarvabhūtānāṃ sarvabhūtamayaśca yaḥ .
īśāvāsyena sambodhyamīśvaraṃ taṃ namāmyaham ..


शान्तिपाठ

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥
ॐ शान्तिः! शान्तिः!! शान्तिः!!!

oṃ pūrṇamadaḥ pūrṇamidaṃ pūrṇātpūrṇamudacyate .
pūrṇasya pūrṇamādāya pūrṇamevāvaśiṣyate ..
oṃ śāntiḥ! śāntiḥ!! śāntiḥ!!!

ॐ वह (परब्रह्म) पूर्ण है और यह (कार्यब्रह्म) भी पूर्ण है; क्योंकि पूर्ण से पूर्ण की ही उत्पत्ति होती है । तथा (प्रलयकाल में) पूर्ण (कार्यब्रह्म) का पूर्णत्व लेकर (अपने में लीन करके) पूर्ण (परब्रह्म) ही बच रहता है ।

त्रिविध ताप की शान्ति हो ।