ॐ उशन्ह वै वाजश्रवसः सर्ववेदसं ददौ ।
तस्य ह नचिकेता नाम पुत्र आस ॥ १ ॥
तस्य ह नचिकेता नाम पुत्र आस ॥ १ ॥
oṃ uśanha vai vājaśravasaḥ sarvavedasaṃ dadau .
tasya ha naciketā nāma putra āsa .. 1 ..
प्रसिद्ध है कि यज्ञफल के इच्छुक वाजश्रवा के पुत्र ने [विश्वजित् यज्ञ में] अपना सारा धन दे दिया । उसका नचिकेता नामक एक प्रसिद्ध पुत्र था ॥ १ ॥
यहाँ जो आख्यायिका है वह विद्या की स्तुति के लिये है । उशन् अर्थात् कामनावाला । ‘ह’ और ‘वै’ ये निपात पहले बीते हुए वृत्तान्त को स्मरण कराने के लिये हैं । ‘वाज’ अन्न को कहते हैं; उसके दानादि के कारण जिसका श्रव यानी यश हो उसे वाजश्रवा कहते हैं; अथवा रूढि से भी यह उसका नाम हो सकता है । उस वाजश्रवा के पुत्र वाजश्रवस ने, जिसमें सर्वस्व समर्पण किया जाता है उस विश्वजित् यज्ञद्वारा, उसके फल की इच्छा से यजन किया । उस यज्ञ में उसने सर्ववेदस् यानी अपना सारा धन दे डाला । कहते हैं, उस यजमान का नचिकेता नामक एक पुत्र था ॥ १ ॥
तात्पर्य पढ़ें
तत्राख्यायिका विद्यास्तुत्यर्था । उशन्कामयमानः, ह वा इति वृत्तार्थस्मरणार्थौ निपातौ । वाजमन्नं तद्दानादिनिमित्तं श्रवो यशो यस्य स वाजश्रवा रूढितो वा । तस्यापत्यं वाजश्रवसः किल विश्वजिता सर्वमेधेनेजे तत्फलं कामयमानः । स तस्मिन्क्रतौ सर्ववेदसं सर्वस्वं धनं ददौ दत्तवान् । तस्य यजमानस्य ह नचिकेता नाम पुत्रः किलास बभूव ॥ १ ॥