अध्याय 1 वल्ली 1 - मन्त्र 9

तिस्रो रात्रीर्यदवात्सीर्गृहे मे अनश्नन्ब्रह्मन्नतिथिर्नमस्यः ।
नमस्तेऽस्तु ब्रह्मन्स्वस्ति मेऽस्तु तस्मात्प्रति त्रीन्वरान्वृणीष्व ॥ ९ ॥

tisro rātrīryadavātsīrgṛhe me anaśnanbrahmannatithirnamasyaḥ .
namaste’stu brahmansvasti me’stu tasmātprati trīnvarānvṛṇīṣva .. 9 ..


हे ब्रह्मन्! तुम्हें नमस्कार हो; मेरा कल्याण हो । तुम नमस्कारयोग्य अतिथि होकर भी मेरे घर में तीन रात्रि तक बिना भोजन किये रहे; अतः एक-एक रात्रि के लिये एक-एक करके मुझसे तीन वर माँग लो ॥ ९ ॥
हे ब्रह्मन्! क्योंकि अतिथि और नमस्कारयोग्य होकर भी तुम तीन रात्रि तक बिना कुछ भोजन किये मेरे घर में रहे हो, अतः तुम्हें नमस्कार है । हे ब्रह्मन्! मेरे घर में बिना भोजन किये आपके निवास करने के निमित्त से हुए दोष से, उससे प्राप्त हुए अनिष्ट फल की शान्तिद्वारा, मेरा मङ्गल—शुभ हो । यद्यपि तुम्हारी कृपा से ही मेरा सब प्रकार कल्याण हो जायगा, तथापि अपनी अधिक प्रसन्नता के लिये तुम बिना भोजन किये बितायी हुई एक-एक रात्रि के प्रति मुझसे तीन वर—अपने अभीष्ट पदार्थविशेष माँग लो ॥ ९ ॥
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तिस्रो रात्रीर्यद्यस्मादवात्सीः, उषितवानसि गृहे मे ममानश्नन् हे ब्रह्मन्नतिथिः सन्नमस्यो नमस्कारार्हश्च तस्मान्नमस्ते तुभ्यमस्तु भवतु । हे ब्रह्मन्स्वस्ति भद्रं मेऽस्तु तस्माद्भवतोऽनशनेन मद्गृहवासनिमित्ताद्दोषात्तत्प्राप्त्युपशमेन । यद्यपि भवदनुग्रहेण सर्वं मम स्वस्ति स्यात्तथापि त्वदधिकसंप्रसादनार्थमनशनेनोपोषिताम् एकैकां रात्रिं प्रति त्रीन्वरान् वृणीष्व अभिप्रेतार्थविशेषान् प्रार्थयस्व मत्तः ॥ ९ ॥

नचिकेता ने कहा—यदि आप वर देना चाहते हैं तो—
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नचिकेतास्त्वाह—यदि दित्सुर्वरान्—