नाचिकेतमुपाख्यानं मृत्युप्रोक्तग्ँ सनातनम् ।
उक्त्वा श्रुत्वा च मेधावी ब्रह्मलोके महीयते ॥ १६ ॥
उक्त्वा श्रुत्वा च मेधावी ब्रह्मलोके महीयते ॥ १६ ॥
nāciketamupākhyānaṃ mṛtyuproktag̐ sanātanam .
uktvā śrutvā ca medhāvī brahmaloke mahīyate .. 16 ..
नचिकेताद्वारा प्राप्त तथा मृत्यु के कहे हुए इस सनातन विज्ञान को कह और सुनकर बुद्धिमान् पुरुष ब्रह्मलोक में महिमान्वित होता है ॥ १६ ॥
नचिकेताद्वारा प्राप्त किये तथा मृत्यु के कहे हुए इस तीन वल्लियोंवाले उपाख्यान को, जो वैदिक होने के कारण सनातन-चिरन्तन है, ब्राह्मणों से कहकर तथा आचार्यों से सुनकर मेधावी पुरुष ब्रह्मलोक में-ब्रह्म ही लोक है; उसमें महिमान्वित होता है अर्थात् सबका आत्मस्वरूप होकर उपासनीय होता है ॥ १६ ॥
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नाचिकेतं नचिकेतसा प्राप्तं नाचिकेतं मृत्युना प्रोक्तं मृत्युप्रोक्तमिदमाख्यानमुपाख्यानं वल्लीत्रयलक्षणं सनातनं चिरन्तनं वैदिकत्वादुक्त्वा ब्राह्मणेभ्यः श्रुत्वाचार्येभ्यो मेधावी ब्रह्मैव लोको ब्रह्मलोकस्तस्मिन्महीयत आत्मभूत उपास्यो भवतीत्यर्थः ॥ १६ ॥