इन्द्रियेभ्यः परं मनो मनसः सत्त्वमुत्तमम् ।
सत्त्वादधि महानात्मा महतोऽव्यक्तमुत्तमम् ॥ ७ ॥
सत्त्वादधि महानात्मा महतोऽव्यक्तमुत्तमम् ॥ ७ ॥
indriyebhyaḥ paraṃ mano manasaḥ sattvamuttamam .
sattvādadhi mahānātmā mahato’vyaktamuttamam .. 7 ..
इन्द्रियों से मन पर (उत्कृष्ट) है, मन से बुद्धि श्रेष्ठ है, बुद्धि से महत्तत्त्व बढ़कर है तथा महत्तत्त्व से अव्यक्त उत्तम है ॥ ७ ॥
इन्द्रियों से मन पर है [तथा मन से बुद्धि श्रेष्ठ है] इत्यादि । इन्द्रियों के सजातीय होने से इन्द्रियों का ग्रहण करने से ही विषयों का भी ग्रहण हो जाता है । अन्य सब पूर्ववत् (कठ० १ । ३ । १० के समान) समझना चाहिये । ‘सत्त्व’ शब्द से यहाँ बुद्धि कही गयी है ॥ ७ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
इन्द्रियेभ्यः परं मन इत्यादि । अर्थानामिहेन्द्रियसमानजातीयत्वादिन्द्रियग्रहणेनैव ग्रहणम् । पूर्ववदन्यत् । सत्त्वशब्दाद्बुद्धिरिहोच्यते ॥ ७ ॥