मुख्य सामग्री पर जाएँ
ॐ
प्राचीन ज्ञान
पुस्तकालय
केनोपनिषद् — शांकरभाष्य
खण्ड 2
☀
प्रातः
☾
रात्रि
ॐ
प्राचीन ज्ञान
✕
पुस्तकालय
केनोपनिषद् — शांकरभाष्य
खण्ड 2
☀
प्रातः
☾
रात्रि
पुस्तकालय
›
श्रुति
›
केनोपनिषद् — शांकरभाष्य
›
खण्ड 2
खण्ड 2
5
श्लोक
हिं
उपलब्ध
१
खण्ड 2 - मन्त्र 1
ब्रह्मज्ञान की अनिर्वचनीयता
२
खण्ड 2 - मन्त्र 2
अनुभूतिका उल्लेख
३
खण्ड 2 - मन्त्र 3
ज्ञाता अज्ञ है और अज्ञ ज्ञानी है
४
खण्ड 2 - मन्त्र 4
विज्ञानाभासों में ब्रह्म की अनुभूति
५
खण्ड 2 - मन्त्र 5
आत्मज्ञान ही सार है