तेऽग्निमब्रुवञ्जातवेद एतद्विजानीहि किमिदं यक्षमिति तथेति ॥ ३ ॥
te’gnimabruvañjātaveda etadvijānīhi kimidaṃ yakṣamiti tatheti .. 3 ..
उन्होंने अग्नि से कहा—‘हे अग्ने! इस बात को मालूम करो कि यह यक्ष कौन है? उसने कहा—‘बहुत अच्छा’ ॥ ३ ॥
पद-भाष्य
उसे न जाननेवाले देवताओं ने भीतर से डरते-डरते उसे जानने की इच्छा से सबसे आगे चलनेवाले सर्वज्ञकल्प जातवेदा अग्नि से कहा—‘हे जातवेद! हमारे नेत्रों के सम्मुख स्थित इस यक्ष को जानो—विशेष रूप से मालूम करो कि यह यक्ष कौन है; क्योंकि तुम हम सब में तेजस्वी हो’ ॥ ३ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
ते तदजानन्तो देवाः सान्तर्भयास्तद्विजिज्ञासवोऽग्निम् अग्रगामिनं जातवेदसं सर्वज्ञकल्पम् अब्रुवन् उक्तवन्तः । हे जातवेद एतद् अस्मदगोचरस्थं यक्षं विजानीहि विशेषतो बुध्यस्व त्वं नस्तेजस्वी किमेतद्यक्षमिति ॥ ३ ॥