खण्ड 3 - मन्त्र 9

तस्मिग्ँस्त्वयि किं वीर्यमित्यपीदग्ँ सर्वमाददीय यदिदं पृथिव्यामिति ॥ ९ ॥

tasmig̐stvayi kiṃ vīryamityapīdag̐ sarvamādadīya yadidaṃ pṛthivyāmiti .. 9 ..


[तब यक्ष ने पूछा—] ‘उस [मातरिश्वारूप] तुझमें क्या सामर्थ्य है? ’ [वायु ने कहा—] ‘पृथिवी में यह जो कुछ है उस सभी को ग्रहण कर सकता हूँ’ ॥ ९ ॥