आगम प्रकरण - कारिका 4

स्थूलं तर्पयते विश्वं प्रविविक्तं तु तैजसम् ।
आनन्दश्च तथा प्राज्ञं त्रिधा तृप्तिं निबोधत ॥ ४ ॥

sthūlaṃ tarpayate viśvaṃ praviviktaṃ tu taijasam .
ānandaśca tathā prājñaṃ tridhā tṛptiṃ nibodhata .. 4 ..


स्थूल पदार्थ विश्वको तृप्त करता है, सूक्ष्म तैजसकी तृप्ति करनेवाला है तथा आनन्द प्राज्ञकी; इस प्रकार इनकी तृप्ति भी तीन तरहकी समझो ॥ ४ ॥
इन दोनों श्लोकोंका अर्थ कहा जा चुका है ॥ ३-४ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
उक्तार्थौ श्लोकौ ॥ ३-४ ॥

त्रिविध भोक्ता और भोग्य के ज्ञान का फल