आगम प्रकरण - कारिका 8

इच्छामात्रं प्रभोः सृष्टिरिति सृष्टौ विनिश्चिताः ।
कालात्प्रसूतिं भूतानां मन्यन्ते कालचिन्तकाः ॥ ८ ॥

icchāmātraṃ prabhoḥ sṛṣṭiriti sṛṣṭau viniścitāḥ .
kālātprasūtiṃ bhūtānāṃ manyante kālacintakāḥ .. 8 ..


कोई-कोई सृष्टिके विषयमें ऐसा निश्चय रखते हैं कि ‘प्रभुकी इच्छा ही सृष्टि है ।’ तथा कालके विषयमें विचार करनेवाले [ज्योतिषी लोग] कालसे ही जीवोंकी उत्पत्ति मानते हैं ॥ ८ ॥
भगवान् सत्यसंकल्प हैं; अतः घटादिकी सृष्टि प्रभुका संकल्पमात्र है—उनके संकल्पसे भिन्न नहीं है । तथा कोई-कोई ‘सृष्टि कालहीसे हुई है’ ऐसा कहते हैं ॥ ८ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
इच्छामात्रं प्रभोः सत्यसंकल्पत्वात्सृष्टिर्घटादिः संकल्पनामात्रं न संकल्पनातिरिक्तम् । कालादेव सृष्टिरिति केचित् ॥ ८ ॥