तैजसस्योत्वविज्ञान उत्कर्षो दृश्यते स्फुटम् ।
मात्रासम्प्रतिपत्तौ स्यादुभयत्वं तथाविधम् ॥ २० ॥
मात्रासम्प्रतिपत्तौ स्यादुभयत्वं तथाविधम् ॥ २० ॥
taijasasyotvavijñāna utkarṣo dṛśyate sphuṭam .
mātrāsampratipattau syādubhayatvaṃ tathāvidham .. 20 ..
तैजस को उकाररूप जाननेपर अर्थात् तैजस उकारमात्रारूप है ऐसा जाननेपर उनका उत्कर्ष स्पष्ट दिखायी देता है । तथा उनका उभयत्व भी स्पष्ट ही है ॥ २० ॥
तैजस के उत्व-विज्ञान में अर्थात् उसका उकाररूप से प्रतिपादन करने में उसका उत्कर्ष तो स्पष्ट ही दिखलायी देता है । इसी प्रकार उभयत्व भी स्पष्ट ही है । शेष सब पूर्ववत् है ॥ २० ॥
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तैजसस्योत्वविज्ञान उकारत्वविवक्षायामुत्कर्षो दृश्यते स्फुटं स्पष्ट इत्यर्थः । उभयत्वं च स्फुटमेवेति । पूर्ववत्सर्वम् ॥ २० ॥