आगम प्रकरण - कारिका 24

ओङ्कारं पादशो विद्यात्पादा मात्रा न संशयः ।
ओङ्कारं पादशो ज्ञात्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत् ॥ २४ ॥

oṅkāraṃ pādaśo vidyātpādā mātrā na saṃśayaḥ .
oṅkāraṃ pādaśo jñātvā na kiñcidapi cintayet .. 24 ..


ओङ्कार को एक-एक पाद करके जाने; पाद ही मात्राएँ हैं—इसमें सन्देह नहीं । इस प्रकार ओङ्कार को पादक्रम से जानकर कुछ भी चिन्तन न करे ॥ २४ ॥
पूर्वोक्त समानताओं के कारण पाद ही मात्राएँ हैं और मात्राएँ ही पाद हैं । अतः तात्पर्य यह है कि ओङ्कार को पादक्रम से जाने । इस प्रकार ओङ्कार का ज्ञान हो जानेपर कृतार्थ हो जाने के कारण किसी भी दृष्टार्थ (ऐहिक) अथवा अदृष्टार्थ (पारलौकिक) प्रयोजन का चिन्तन न करे—यह इसका अभिप्राय है ॥ २४ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
यथोक्तैः सामान्यैः पादा एव मात्रा मात्राश्च पादास्तस्मादोङ्कारं पादशो विद्यादित्यर्थः । एवमोङ्कारे ज्ञाते दृष्टार्थमदृष्टार्थं वा न किञ्चित् प्रयोजनं चिन्तयेत्कृतार्थत्वादित्यर्थः ॥ २४ ॥