वैतथ्य प्रकरण - कारिका 11

उभयोरपि वैतथ्यं भेदानां स्थानयोर्यदि ।
क एतान्बुध्यते भेदान्को वै तेषां विकल्पकः ॥ ११ ॥

ubhayorapi vaitathyaṃ bhedānāṃ sthānayoryadi .
ka etānbudhyate bhedānko vai teṣāṃ vikalpakaḥ .. 11 ..


यदि [जागरित और स्वप्न] दोनों ही स्थानों के पदार्थों का मिथ्यात्व है तो इन पदार्थों को जानता कौन है और कौन इनकी कल्पना करनेवाला है? ॥ ११ ॥

यदि स्वप्न और जागरित [दोनों ही स्थानों]-के पदार्थों का मिथ्यात्व है तो चित्त के भीतर या बाहर कल्पना किये हुए इन पदार्थों को जानता कौन है? और कौन उनकी कल्पना करनेवाला है?

तात्पर्य यह है कि यदि निरात्मवाद अभीष्ट नहीं है तो [यह बताना चाहिये कि] उक्त स्मरण (स्वप्न) और ज्ञान (जागरित)-का आलम्बन कौन है? ॥ ११ ॥

संस्कृत भाष्य पढ़ें

स्वप्नजाग्रत्स्थानयोर्भेदानां यदि वैतथ्यं क एतानन्तर्बहिश्चेतःकल्पितान्बुध्यते । को वै तेषां विकल्पकः ।

स्मृतिज्ञानयोः क आलम्बनमित्यभिप्रायः, न चेन्निरात्मवाद इष्टः ॥ ११ ॥