वैतथ्य प्रकरण - कारिका 21

पादा इति पादविदो विषया इति तद्विदः ।
लोका इति लोकविदो देवा इति च तद्विदः ॥ २१ ॥

pādā iti pādavido viṣayā iti tadvidaḥ .
lokā iti lokavido devā iti ca tadvidaḥ .. 21 ..


पादवेत्ता कहते हैं—‘विश्व आदि पाद ही सम्पूर्ण व्यवहार के हेतु हैं ।’ [वात्स्यायनादि] विषयज्ञ कहते हैं—‘शब्दादि विषय ही सत्य वस्तु हैं ।’ लोकवेत्ताओं(पौराणिकों)-का कथन है—‘लोक ही सत्य हैं ।’ तथा देवोपासक कहते हैं—‘इन्द्रादि देवता ही सृष्टि के सञ्चालक हैं’ ॥ २१ ॥