काल इति कालविदो दिश इति च तद्विदः ।
वादा इति वादविदो भुवनानीति तद्विदः ॥ २४ ॥
वादा इति वादविदो भुवनानीति तद्विदः ॥ २४ ॥
kāla iti kālavido diśa iti ca tadvidaḥ .
vādā iti vādavido bhuvanānīti tadvidaḥ .. 24 ..
कालज्ञ (ज्यौतिषी लोग) कहते हैं—‘काल ही परमार्थ है ।’ दिशाओं के जाननेवाले (स्वरोदयशास्त्री) कहते हैं—‘दिशाएँ ही सत्य वस्तु हैं ।’ वादवेत्ता कहते हैं—‘[धातुवाद, मन्त्रवाद आदि] वाद ही सत्य वस्तु हैं ।’ तथा भुवनकोष के ज्ञाताओं का कथन है कि भुवन ही परमार्थ हैं ॥ २४ ॥