पञ्चविंशक इत्येके षड्विंश इति चापरे ।
एकत्रिंशक इत्याहुरनन्त इति चापरे ॥ २६ ॥
एकत्रिंशक इत्याहुरनन्त इति चापरे ॥ २६ ॥
pañcaviṃśaka ityeke ṣaḍviṃśa iti cāpare .
ekatriṃśaka ityāhurananta iti cāpare .. 26 ..
कोई (सांख्यवादी) पच्चीस तत्त्वों को, कोई (पातञ्जलमतावलम्बी) छब्बीसों को और कोई (पाशुपत) इकतीस तत्त्वों को सत्य मानते हैं[*] तथा अन्य मतावलम्बी परमार्थ को अनन्त भेदोंवाला मानते हैं ॥ २६ ॥