असतो मायया जन्म तत्त्वतो नैव युज्यते ।
बन्ध्यापुत्रो न तत्त्वेन मायया वापि जायते ॥ २८ ॥
बन्ध्यापुत्रो न तत्त्वेन मायया वापि जायते ॥ २८ ॥
asato māyayā janma tattvato naiva yujyate .
bandhyāputro na tattvena māyayā vāpi jāyate .. 28 ..
असद्वस्तु का जन्म तो माया से अथवा तत्त्वतः किसी प्रकार भी होना सम्भव नहीं है । बन्ध्या का पुत्र न तो वस्तुतः उत्पन्न होता है और न माया से ही ॥ २८ ॥
असद्वादियों के पक्ष में भी, असत् वस्तु का जन्म माया से अथवा वस्तुतः किसी प्रकार होना सम्भव नहीं है, क्योंकि ऐसा देखा नहीं जाता । बन्ध्या का पुत्र न तो माया से उत्पन्न होता है और न वस्तुतः ही । अतः तात्पर्य यह हुआ कि असद्वाद तो सर्वथा ही अयुक्त है ॥ २८ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
असद्वादिनामसतो भावस्य मायया तत्त्वतो वा न कथञ्चन जन्म युज्यते, अदृष्टत्वात् । न हि बन्ध्यापुत्रो मायया तत्त्वतो वा जायते तस्मादत्रासद्वादो दूरत एवानुपपन्न इत्यर्थः ॥ २८ ॥
सत् वस्तु का जन्म माया से ही कैसे हो सकता है—इसपर कहते हैं—
संस्कृत भाष्य पढ़ें
कथं पुनः सतो माययैव जन्मेत्युच्यते—