अद्वैत प्रकरण - कारिका 40

मनसो निग्रहायत्तमभयं सर्वयोगिनाम् ।
दुःखक्षयः प्रबोधश्चाप्यक्षया शान्तिरेव च ॥ ४० ॥

manaso nigrahāyattamabhayaṃ sarvayoginām .
duḥkhakṣayaḥ prabodhaścāpyakṣayā śāntireva ca .. 40 ..


समस्त योगियों के अभय, दुःखक्षय, प्रबोध और अक्षय शान्ति मन के निग्रह के ही अधीन हैं ॥ ४० ॥
समस्त योगियों का अभय मन के निग्रह के अधीन है । यही नहीं, दुःखक्षय भी [मनोनिग्रह के ही अधीन है], क्योंकि आत्मा से सम्बन्ध रखनेवाले मन के चलायमान रहते हुए अविवेकी पुरुषों का दुःखक्षय नहीं हो सकता । इसके सिवा उनका आत्मज्ञान भी मन के निग्रह के ही अधीन है तथा मोक्षनाम्नी उनकी अक्षय शान्ति भी मनोनिग्रह के ही अधीन है ॥ ४० ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
मनसो निग्रहायत्तमभयं सर्वेषां योगिनाम् । किं च दुःखक्षयोऽपि, न ह्यात्मसम्बन्धिनि मनसि प्रचलिते दुःखक्षयोऽस्ति अविवेकिनाम् । किं चात्मप्रबोधोऽपि मनोनिग्रहायत्त एव । तथाक्षयापि मोक्षाख्या शान्तिस्तेषां मनोनिग्रहायत्तैव ॥ ४० ॥