अलातशान्ति प्रकरण - कारिका 31

आदावन्ते च यन्नास्ति वर्तमानेऽपि तत्तथा ।
वितथैः सदृशाः सन्तोऽवितथा इव लक्षिताः ॥ ३१ ॥

ādāvante ca yannāsti vartamāne’pi tattathā .
vitathaiḥ sadṛśāḥ santo’vitathā iva lakṣitāḥ .. 31 ..


जो आदि और अन्त में नहीं है वह वर्तमान में भी वैसा [अर्थात् असद्रूप] ही है । ये पदार्थसमूह असत् के समान होकर भी सत्जै से दिखायी देते हैं ॥ ३१ ।