अलातशान्ति प्रकरण - कारिका 34

न युक्तं दर्शनं गत्वा कालस्यानियमाद्रतौ ।
प्रतिबुद्धश्च वै सर्वस्तस्मिन्देशे न विद्यते ॥ ३४ ॥

na yuktaṃ darśanaṃ gatvā kālasyāniyamādratau .
pratibuddhaśca vai sarvastasmindeśe na vidyate .. 34 ..


देशान्तर में जा ने में जो समय लगता है [स्वप्नावस्थामें] उसका नियम न हो ने के कारण स्वप्न के पदार्थों को उनके पास जाकर देखना तो सम्भव नहीं है । इसके सिवा जाग ने पर भी कोई उस (स्वप्नदृष्ट) देश में नहीं रहता ॥ ३४ ॥
जागृति में जो आनेजा ने के समय और प्रमाणसिद्ध देश नियत हैं उनका नियम न हो ने के कारण स्वप्नावस्था में देशान्तर में जाना नहीं होता—यह इसका अभिप्राय है ॥ ३४ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
जागरिते गत्यागमनकालो नियतो देशः प्रमाणतो यस्तस्यानियमान्नियमस्याभावात्स्वप्ने न देशान्तरगमनमित्यर्थः ॥ ३४ ॥