ख्याप्यमानामजातिं तैरनुमोदामहे वयम् ।
विवदामो न तैः सार्धमविवादं निबोधत ॥ ५ ॥
विवदामो न तैः सार्धमविवादं निबोधत ॥ ५ ॥
khyāpyamānāmajātiṃ tairanumodāmahe vayam .
vivadāmo na taiḥ sārdhamavivādaṃ nibodhata .. 5 ..
उनके द्वारा प्रकाशित की हुई अजाति का हम भी अनुमोदन करते हैं । हम उनसे विवाद नहीं करते । अतः तुम उस निर्विवाद [परमार्थदर्शन]-को अच्छी तरह समझ लो ॥ ५ ॥
उनके द्वारा इस प्रकार प्रकाशित की गयी अजाति का हम ‘ऐसा ही हो’ इस प्रकार केवल अनुमोदन करते हैं ।
तात्पर्य यह है कि पक्ष-प्रतिपक्ष लेकर उनके साथ विवाद नहीं करते, जैसा कि वे आपस में किया करते हैं । अतः हे शिष्यगण! हमारे द्वारा उपदेश किये हुए उस अविवाद—विवादरहित परमार्थ-दर्शन को तुम अच्छी तरह समझ लो ॥ ५ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
तैरेवं ख्याप्यमानामजातिमेवमस्त्वित्यनुमोदामहे केवलं न तैः सार्धं विवदामः पक्षप्रतिपक्षग्रहणेन; यथा तेऽन्योन्यमित्यभिप्रायः । अतस्तमविवादं विवादरहितं परमार्थदर्शनमनुज्ञातमस्माभिर्निबोधत हे शिष्याः ॥ ५ ॥