न निर्गता अलातात्ते द्रव्यत्वाभावयोगतः ।
विज्ञानेऽपि तथैव स्युराभासस्याविशेषतः ॥ ५० ॥
विज्ञानेऽपि तथैव स्युराभासस्याविशेषतः ॥ ५० ॥
na nirgatā alātātte dravyatvābhāvayogataḥ .
vijñāne’pi tathaiva syurābhāsasyāviśeṣataḥ .. 50 ..
उनमें द्रव्यत्व के अभाव का योग होने के कारण वे अलात से भी नहीं निकलते हैं । इसी प्रकार आभासत्व में समानता होने के कारण विज्ञान के विषय में भी समझना चाहिये ॥ ५० ॥
द्रव्यत्वाभावयोग के कारण—द्रव्य के भाव का नाम द्रव्यत्व है, उसके अभाव को द्रव्यत्वाभाव कहते हैं, उस द्रव्यत्वाभावयोग अर्थात् द्रव्यत्वाभावरूप युक्ति के कारण यानी वस्तुत्व का अभाव होने से वे आभास घर आदि से निकलने के समान अलात से भी नहीं निकले; क्योंकि प्रवेशादि होने तो वस्तु के ही सम्भव हैं, अवस्तु के नहीं । विज्ञान में [प्रतीत होनेवाले] जात्यादि आभास भी ऐसे ही समझने चाहिये, क्योंकि आभास की सामान्यता होने से उनकी तुल्यता है ॥ ५० ॥
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न निर्गता अलातात्त आभासा गृहादिवदद्रव्यत्वाभावयोगतः—द्रव्यस्य भावो द्रव्यत्वम्, तदभावो द्रव्यत्वाभावः, द्रव्यत्वाभावयोगतो द्रव्यत्वाभावयुक्तेर्वस्तुत्वाभावादित्यर्थः; वस्तुनो हि प्रवेशादि सम्भवति नावस्तुनः । विज्ञानेऽपि जात्याद्याभासास्तथैव स्युराभासस्याविशेषतस्तुल्यत्वात् ॥ ५० ॥
उनकी तुल्यता किस प्रकार है? सो बतलाते हैं—
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कथं तुल्यत्वमित्याह—