अलातशान्ति प्रकरण - कारिका 59

यथा मायामयाद्वीजाज्जायते तन्मयोऽङ्कुरः ।
नासौ नित्यो न चोच्छेदी तद्वद्धर्मेषु योजना ॥ ५९ ॥

yathā māyāmayādvījājjāyate tanmayo’ṅkuraḥ .
nāsau nityo na cocchedī tadvaddharmeṣu yojanā .. 59 ..


जिस प्रकार मायामय बीज से मायामय अङ्कुर उत्पन्न होता है और वह न तो नित्य ही होता है और न नाशवान् ही, उसी प्रकार धर्मों के विषय में भी युक्ति समझनी चाहिये ॥ ५९ ॥
जिस प्रकार मायामय आम आदि के बीज से तन्मय अर्थात् मायामय अङ्कुर उत्पन्न होता है और वह अङ्कुर न तो नित्य ही होता है और न नाशवान् ही, उसी प्रकार असत्य होने के कारण धर्मों में भी जन्म-नाशादि की योजना—युक्ति है । तात्पर्य यह है कि परमार्थतः धर्मों का जन्म अथवा नाश होना सम्भव नहीं है ॥ ५९ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
यथा मायामयादाम्रादिवीजाज्जायते तन्मयो मायामयोऽङ्कुरो नासावङ्कुरो नित्यो न चोच्छेदी विनाशी वाभूतत्वात्तद्वदेव धर्मेषु जन्मनाशादियोजना युक्तिः । न तु परमार्थतो धर्माणां जन्म नाशो वा युज्यत इत्यर्थः ॥ ५९ ॥