अलातशान्ति प्रकरण - कारिका 7

न भवत्यमृतं मर्त्यं न मर्त्यममृतं तथा ।
प्रकृतेरन्यथाभावो न कथञ्चिद्भविष्यति ॥ ७ ॥

na bhavatyamṛtaṃ martyaṃ na martyamamṛtaṃ tathā .
prakṛteranyathābhāvo na kathañcidbhaviṣyati .. 7 ..


मरणरहित वस्तु कभी मरणशील नहीं हो सकती और मरणशील मरणहीन नहीं हो सकती, क्योंकि किसीके स्वभाव का विपर्यय किसी प्रकार होनेवाला नहीं है ॥ ७ ॥