प्रश्न 1 - मन्त्र 14

अन्नं वै प्रजापतिस्ततो ह वै तद्रेतस्तस्मादिमाः प्रजाः प्रजायन्त इति ॥ १४ ॥

annaṃ vai prajāpatistato ha vai tadretastasmādimāḥ prajāḥ prajāyanta iti .. 14 ..


अन्न ही प्रजापति है; उसी से वह वीर्य होता है और उस वीर्य ही से यह सम्पूर्ण प्रजा उत्पन्न होती है ॥ १४ ॥

अन्न ही प्रजापति है । किस प्रकार?

[सो बतलाते हैं—] उस अन्न से ही प्रजा का कारणरूप रेत—पुरुष का वीर्य उत्पन्न होता है; और स्त्री की योनि में सींचे गये उस वीर्य से ही यह मनुष्यादिरूप प्रजा उत्पन्न होती है ।

हे कबन्धिन्! तूने जो पूछा था कि यह सम्पूर्ण प्रजा कहाँ से उत्पन्न होती है? सो चन्द्रमा और आदित्यरूप मिथुन से लेकर अहोरात्रपर्यन्त क्रम से अन्न, रक्त एवं वीर्य के द्वारा ही यह सारी प्रजा उत्पन्न होती है—ऐसा निर्णय हुआ ॥ १४ ॥

संस्कृत भाष्य पढ़ें

अन्नं वै प्रजापतिः । कथम्?

ततस्तस्माद्ध वै रेतो नृबीजं तत्प्रजाकारणं तस्माद्योषिति सिक्तादिमा मनुष्यादिलक्षणाः प्रजाः प्रजायन्ते ।

यत्पृष्टं कुतो ह वै प्रजाः प्रजायन्त इति । तदेवं चन्द्रादित्यमिथुनादिक्रमेणाहोरात्रान्तेनान्नासृग्रेतोद्वारेणेमाः प्रजाः प्रजायन्त इति निर्णीतम् ॥ १४ ॥