प्रश्न 1 - मन्त्र 3

अथ कबन्धी कात्यायन उपेत्य पप्रच्छ ।
भगवन् कुतो ह वा इमाः प्रजाः प्रजायन्त इति ॥ ३ ॥

atha kabandhī kātyāyana upetya papraccha .
bhagavan kuto ha vā imāḥ prajāḥ prajāyanta iti .. 3 ..


तदनन्तर (एक वर्ष गुरुकुलवास करने के पश्चात्) कात्यायन कबन्धी ने गुरुजी के पास जाकर पूछा—‘भगवन्! यह सारी प्रजा किससे उत्पन्न होती है? ’ ॥ ३ ॥
तदनन्तर एक वर्ष पीछे कात्यायन कबन्धी ने [गुरुजी के] समीप जाकर पूछा—‘भगवन्! यह ब्राह्मणादि सम्पूर्ण प्रजा किससे उत्पन्न होती है? ’ अर्थात् अपरब्रह्मविषयक ज्ञान एवं कर्म के समुच्चय का जो कार्य है और उसकी जो गति है वह बतलानी चाहिये । उसी के लिये यह प्रश्न किया गया है ॥ ३ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
अथ संवत्सरादूर्ध्वं कबन्धी कात्यायन उपेत्योपगम्य पप्रच्छ पृष्टवान् । हे भगवन् कुतः कस्माद्ध वा इमा ब्राह्मणाद्याः प्रजाः प्रजायन्त उत्पद्यन्ते । अपरविद्याकर्मणोः समुच्चितयोर्यत्कार्यं या गतिस्तद्वक्तव्यमिति तदर्थोऽयं प्रश्नः ॥ ३ ॥