प्रश्न 4 - मन्त्र 11

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यश्रीमद्गोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ प्रश्नोपनिषद्भाष्ये चतुर्थः प्रश्नः ॥ ४ ॥

विज्ञानात्मा सह देवैश्च सर्वैः प्राणा भूतानि संप्रतिष्ठन्ति यत्र ।
तदक्षरं वेदयते यस्तु सोम्य स सर्वज्ञः सर्वमेवाविवेशेति ॥ ११ ॥

vijñānātmā saha devaiśca sarvaiḥ prāṇā bhūtāni saṃpratiṣṭhanti yatra .
tadakṣaraṃ vedayate yastu somya sa sarvajñaḥ sarvamevāviveśeti .. 11 ..


हे सोम्य! जिस अक्षर में समस्त देवों के सहित विज्ञानात्मा प्राण और भूत सम्यक् प्रकार से स्थित होते हैं उसे जो जानता है वह सर्वज्ञ सभी में प्रवेश कर जाता है ॥ ११ ॥
जिस अक्षर में अग्नि आदि देवों के सहित विज्ञानात्मा तथा चक्षु आदि प्राण और पृथिवी आदि भूत प्रतिष्ठित होते अर्थात् प्रवेश करते हैं । हे सोम्य—हे प्रियदर्शन! उस अक्षर को जो जानता है वह सर्वज्ञ सभी में आविष्ट अर्थात् प्रविष्ट हो जाता है ॥ ११ ॥
संस्कृत भाष्य पढ़ें
विज्ञानात्मा सह देवैश्चाग्न्यादिभिः प्राणाश्चक्षुरादयो भूतानि पृथिव्यादीनि संप्रतिष्ठन्ति प्रविशन्ति यत्र यस्मिन्नक्षरे तदक्षरं वेदयते यस्तु सोम्य प्रियदर्शन स सर्वज्ञः सर्वमेव आविवेशाविशतीत्यर्थः ॥ ११ ॥

पञ्चम प्रश्न