३ - अरण्यकाण्ड
3 - Aranya Kaand
अरण्यकाण्ड में शूर्पणखा वध से सीता हरण प्रकरण तक के घटनाक्रम आते हैं ।
१
भाग - १
Part - 1
मङ्गलाचरण
२
भाग - २
Part - 2
जयन्त की कुटिलता और फल प्राप्ति
३
भाग - ३
Part - 3
अत्रि-मिलन एवं स्तुति
४
भाग - ४
Part - 4
श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजी को अनसूयाजी का पतिव्रत धर्म कहना
५
भाग - ५
Part - 5
श्रीरामजी का आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
६
भाग - ६
Part - 6
राक्षस-वध की प्रतिज्ञा करना
७
भाग - ७
Part - 7
सुतीक्ष्णजी का प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, राम का दण्डकवन-प्रवेश और जटायु-मिलन, पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
८
भाग - ८
Part - 8
शूर्पणखा की कथा, शूर्पणखा का खर-दूषण के पास जाना और खर-दूषणादि का वध
९
भाग - ९
Part - 9
शूर्पणखा का रावण के निकट जाना, श्रीसीताजी का अग्नि-प्रवेश और माया-सीता
१०
भाग - १०
Part - 10
मारीच प्रसङ्ग और स्वर्णमृग रूप में मारीच का मारा जाना
११
भाग - ११
Part - 11
श्रीसीता हरण और श्रीसीता-विलाप
१२
भाग - १२
Part - 12
जटायु-रावण युद्ध
१३
भाग - १३
Part - 13
श्रीरामजी का विलाप, जटायु का प्रसङ्ग, कबन्ध-उद्धार
१४
भाग - १४
Part - 14
शबरी पर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासर की ओर प्रस्थान
१५
भाग - १५
Part - 15
नारद-राम-संवाद
१६
भाग - १६
Part - 16
संतों के लक्षण और सत्सङ्ग-भजन के लिये प्रेरणा