यस्माज्जातं जगत्सर्वं यस्मिन्नेव प्रलीयते ।
येनेदं धार्यते चैव तस्मै ज्ञानात्मने नमः ॥ १ ॥
येनेदं धार्यते चैव तस्मै ज्ञानात्मने नमः ॥ १ ॥
yasmājjātaṃ jagatsarvaṃ yasminneva pralīyate .
yenedaṃ dhāryate caiva tasmai jñānātmane namaḥ .. 1 ..
जिससे सारा जगत् उत्पन्न हुआ है, जिसमें ही यह लीन होता है और जिसके द्वारा यह धारण भी किया जाता है उस ज्ञानस्वरूप को मेरा नमस्कार है ॥ १ ॥