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तैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्य
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अनुवाक 10
5
श्लोक
हिं
उपलब्ध
१
वल्ली 3 अनुवाक 10 - मन्त्र 1
इति भृगुवल्ल्यां नवमोऽनुवाकः ॥ ९ ॥
२
वल्ली 3 अनुवाक 10 - मन्त्र 2
३
वल्ली 3 अनुवाक 10 - मन्त्र 3
४
वल्ली 3 अनुवाक 10 - मन्त्र 4
५
वल्ली 3 अनुवाक 10 - मन्त्र 5
आदित्य और देहोपाधिक चेतन की एकता जाननेवाले उपासक को मिलनेवाला फल