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ॐ प्राचीन ज्ञान
पुस्तकालयतैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्यभृगुवल्लीअनुवाक 2
ॐ प्राचीन ज्ञान
पुस्तकालयतैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्यभृगुवल्लीअनुवाक 2
पुस्तकालय› श्रुति› तैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्य› भृगुवल्ली› अनुवाक 2

अनुवाक 2

1 श्लोक हिं उपलब्ध
१

वल्ली 3 अनुवाक 2 - मन्त्र 1

अन्न ही ब्रह्म है—ऐसा जानकर और उसमें ब्रह्म के लक्षण घटाकर भृगु का पुनः वरुण के पास आना और उसके उपदेश से पुनः तप करना
सा विद्या या विमुक्तये प्राचीन ज्ञान · Ancient Knowledge