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अनुवाक 3
1
श्लोक
हिं
उपलब्ध
१
वल्ली 3 अनुवाक 3 - मन्त्र 1
प्राण ही ब्रह्म है—ऐसा जानकर और उसी में ब्रह्म के लक्षण घटाकर भृगु का पुनः वरुण के पास आना और उनके उपदेश से पुनः तप करना