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ॐ प्राचीन ज्ञान
पुस्तकालयतैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्यभृगुवल्लीअनुवाक 4
ॐ प्राचीन ज्ञान
पुस्तकालयतैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्यभृगुवल्लीअनुवाक 4
पुस्तकालय› श्रुति› तैत्तिरीयोपनिषद् — शांकरभाष्य› भृगुवल्ली› अनुवाक 4

अनुवाक 4

1 श्लोक हिं उपलब्ध
१

वल्ली 3 अनुवाक 4 - मन्त्र 1

मन ही ब्रह्म है—ऐसा जानकर और उसमें ब्रह्म के लक्षण घटाकर भृगु का पुनः वरुण के पास आना और उनके उपदेश से पुनः तप करना
सा विद्या या विमुक्तये प्राचीन ज्ञान · Ancient Knowledge