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अनुवाक 4
1
श्लोक
हिं
उपलब्ध
१
वल्ली 3 अनुवाक 4 - मन्त्र 1
मन ही ब्रह्म है—ऐसा जानकर और उसमें ब्रह्म के लक्षण घटाकर भृगु का पुनः वरुण के पास आना और उनके उपदेश से पुनः तप करना